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Debit And Credit Meaning In Hindi-?

debit and credit meaning

दोस्तो आज के blog post में हम जानेंगे कि Debit क्या होता है और Credit क्या होता है। debit and credit rules? debit and credit meaning in hindi? debit and credit card? debit and credit examples? what does debit and credit mean? debit and credit meaning in hindi? दोस्तों Debit And Credit Rules को समझने के लिए आपको पता होना चाहिए कि Accounting क्या होता है। Introduction to accounting  पर हमने आर्टिकल पोस्ट कर रखा है बेहतर होगा यदि आप उसे एक बार पढ़ लें। तो चलिए शुरू करते हैं। 


क्या होता है Debit और Credit ;- Account में Debit का लघु नाम Dr. होता है। तथा Credit का लघु नाम Cr. होता है। Accounting में Dr.और Cr.का विशेष महत्व है।‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ क्योंकि Dr.और Cr.को समझें बिना न तो लेखा बनाया जा सकता है और न ही किसी भी प्रकार की Entry कि जा सकती है। अतः Accounting को सीखने के लिए Dr. और Cr. को जानना जरूरी है। जिस तरह विषय गणित में + और - के बिना questions को‌ हल नहीं कर पाते।

उसी तरह Account को Dr. और Cr. के बिना नहीं बनाया जाता।  प्रत्येक Deal (सौदे) के दो पहलू होते हैं। लेन और देन।  द्वि-अंक Account के द्वारा प्रत्येक सौदे का लेखा दो स्थानों पर किया है।इसलिए लेखा करते समय यह देखना आवश्यक है कि जितनी राशि को नाम पक्ष में लिखा गया है उतनी ही राशि को जमा पक्ष में भी लिखा जाए। लेखांकन में नाम व जमा का अर्थ है कि सौदे को नाम में यानि कि बायीं ओर लिखना है। या जमा में अर्थात दायीं और लिखना है।

Account अंग्रेजी के शब्द T के आकार का होता है। जब लेखा बनाया जाता है तो बाईं तरफ Debit लिखा जाता है। तथा दायीं तरफ Cr, लिखा जाता है। Debit यानि। यदि कोई भी चीज आपके पास आ रही है। तो‌ उसे Dr. किया जायगा। example: यदि business में आपके पास Furniture आया तो वह Furniture Dr. किया जायगा। लेखा बनाते समय जब प्रविष्ट दायीं और लिखना हो तो खाते को जमा करना कहा जाता है। यदि कोई पैसा ले रहा है‌। तो उसे भी बाईं और यानि Dr.‌में लिखा जाएगा।

debit and credit rules; यदि हमारे पास से कैश जाता है तो वह Cr. किया जाएगा। और हमारे पास किसी के पास से कुछ भी आता है तो वह भी Cr. किया जाएगा। जो व्यक्ति कुछ भी ले रहा है उसे Dr. किया जाएगा। व्यवसाय में जो कमाई होती है उसे Cr. किया जाएगा। तथा Loss और Expenses को Dr. कर देते हैं। Asset को Dr. तथा  Liabilities को Cr. में लिखते हैं। लेने-देनो को लिखने कि द्रष्टि से सभी खातों को पांच वर्गों में बांटा जाता है। परिसंपत्ति, देयता, पूंजी, व्यय/हानियां, आगम/लाभ,


खातों में सौदों को लिखने के लिए  मूल रूप से दो नियमों का पालन किया जाता है। 

(1) परिसंपत्ति, व्यय व हानि खातों में परिवर्तन के लिए नियम:

 (i) परिसंपत्ति में वृध्दि को नाम व कमी का जमा पक्ष में दर्ज कर दिया जाएगा। 

(ii) व्ययों/हानियों में वृध्दि को नाम व कमी को जमा पक्ष में दर्ज कर दिया जाएगा। 

(2) देयताओं, पूंजी, आगम व लाभों में परिवर्तन के लिए नियम:  

(i) देयताओं में वृध्दि को जमा व कमी को नाम पक्ष में दर्ज कर दिया जाएगा। 

(ii) पूंजी में वृध्दि को जमा व कमी को नाम पक्ष में दर्ज कर दिया जाएगा। 

(iii) आगम/लाभ में वृध्दि को जमा पक्ष में व कमी को नाम पक्ष में दर्ज कर दिया जाएगा।

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Conclusion (उपसंहार): हमारे आर्टिकल ‌debit and credit को पढ़ने के लिए आप का‌ बहुत शुक्रिया अगर आप हमारी वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को Follow करें तथा Comment के जरिए से अपनी राय जरुर दें। Accountinghindi पर विषय Account को बहुत आसान करके समझाया गया है। आप और भी आर्टिकल पढ़ सकते हैं। 

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