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Bank Reconciliation Statement

 

बैंक समाधान विवरण प्रारुप (bank reconciliation statement format) क्या है ?-

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, प्यारे दोस्तों हमारी Website Accountinghindi.blogspot.com Visit करने के लिए बहुत शुक्रिया, दोस्तों यदि आप Accounting सीखना चाहते हैं तो मुझे भरोसा है, हमारी Website आपके लिए लाभदायक साबित होगी।दोस्तो आज के Article में हम बात करेंगे,

बैंक समाधान विवरण प्रारूप (bank reconciliation statement format) क्या होता है- ?

दोस्तों किसी भी व्यवसाय का एक संगठन होता है,वह व्यवसायिक संगठन रोकड़ बही में नकद व बैंक संबंधी लेन-देनो का अभिलेखन (लिखना) करती है। रोकड बही रोकड़ खाते व बैंक खाते दोनों का शेष दिखाती है।

बैंक समाधान विवरण एक ऐसा विवरण है जिसकी मदद से हम अपने बैंक खाते तथा बैंक पासबुक में अंतर का पता लगा लेते हैं।

एक बार जब रोकड़ बही को संतुलित कर लिया जाता है। तो यह एक समान अभ्यास होगा कि उसमें लिखित लेन-देन का मिलान बैंक पासबुक (Bank Passbook) की प्रविष्टि (Entry) से किया जाता है। इस तरह कि जांच के लिए जरूरी है कि रोकड़िया (cashier) इस बात से संतुष्ट हो कि रोकड़ बही में सभी लेन-देनो कि Entry हो चुकी है तथा बैंक से पासबुक पुरी करवा कर या खाते की Report मंगवा ली गयी है।

बैंक समाधान प्रारूप (bank reconciliation format) बैंक विवरण या पासबुक हमारे खाते में कि गई अलग-अलग प्रविष्टियों (Entries) कि बैंक दस्तावेजों से उतारी गई नकल होती है। इसकी मदद से बैंक के ग्राहक नियमों के अनुसार अपनी रोकड़ बही में लिखे गए लेन-देन का मिलान बैंक पुस्तकों में अपने खाते में किए गए लेन-देन से कर अपने लेखों को पूरा कर सकते हैं।

बैंक विवरण अथवा पासबुक में दिखाई गई धन राशि के शेष का मिलान रोकड़ बही के बैंक स्तम्भ में दर्शाए गए शेष से होना चाहिए।
लेकिन व्यवहार में इन दोनों के शेष में अंतर पाया जाता है।
पासबुक के प्रदर्श का अध्ययन करने पर आप पाएंगे कि सभी जमा किए गए चेक व रोकड़ संबंधि सौदे इसके जमा पक्ष में दर्शाए गए हैं।

इसलिए यदि जमा राशि आहरित राशि से अधिक होगी तो यह जमा शेष का प्रदर्शन करेगा और यदि आहरण जमा कि गई राशि से अधिक होगा तो यह नाम शेष अधिविकर्ष का दिखावा करेगा।
बैंक समाधान विवरण प्रारुप (bank reconciliation statement format) क्या है

चालू खाते का उदाहरण (current account example)


चालू खाते को अंग्रेजी भाषा में Current Account कहा जाता है। चालू खाता आम व्यक्ति नहीं खुलवा सकता, चालू खातों का प्रयोग व्यापारी करता है व्यापारी छोटा हो या बड़ा। तथा चालू खाते को व्यापारी अपने व्यापार की लेन-देन (Transaction) करने के लिए खुलवाता है।

 चालू खाते को खुलवाने के कई फायदे होने के साथ-साथ एक नुक्सान का भी सामना करना पड़ता है। चालू खाता एक interest free account है। यानि चालू खाते में जो पैसा जमा किया जाता है उस पर कोई भी ब्याज दर नहीं मिलती इसलिए चालू खाता एक ब्याज मुफ़्त खाता है।

चालू खाते का‌ उदाहरण,
 रोकड बही के अनुसार दिखाया गया शेष,
          जोड़िए।                                      
भुगतान के लिए निर्गमित चेक जो बैंक में मौजूद नहीं हुए, बैंक द्वारा दी गई ब्याज की राशि।
          घटाइए।
जमा किए गए चेक जिन्हें अभी संग्रहित नहीं किया गया है, बैंक शुल्क जिसे रोकड बही में नहीं लिखा गया है। पासबुक के अनुसार शेष।

इसे राशि के दो स्तंभों के साथ भी बनाया जा सकता है जिनमें एक जोड़ने (+) वाली मदों की राशि व दूसरी घटाने (-) वाली मदों की राशि का प्रदर्शन करता है। सुविधा की दृष्टि से सामान रूप से इसी प्रारूप को मान्यता प्राप्त है।

बैंक समाधान विवरण की (need of bank reconciliation statement) आवश्यकता-?

सामान्य रूप से ऐसा अनुभव किया गया है कि जब रोकड़ बही द्वारा दिखाए गए बैंक स्तम्भ के योग की तुलना बैंक विवरण द्वारा प्रदर्शित शेष से की जाती है। तो यह समान नहीं होते, इन में अंतर होता है। 

इसलिए हमें सबसे पहले इस अंतर के कारणों का निर्धारण करना पड़ता है और उन्हें एक विवरण जिसे बैंक समाधान विवरण कहा जाता है, में परिवर्तित किया जाता है। यह विवरण इन दोनों पुस्तकों के शेषों का मिलान कर देता है।

 बैंक समाधान विवरण बनाने के लिए हमारे पास रोकड बही के अनुसार बैंक स्तम्भ में दिया गया शेष व उस तिथि विशेष तक दोनों पुस्तकों में दर्शाए गए लेन-देन का विवरण उपलब्ध होना चाहिये। यदि दोनों पुस्तकों के शेषो में अंतर पाया जाता है तो उनमें दिखाई गई विभिन्न मदों कि तुलना कर अंतर तथा उस धन राशि का निर्धारण किया जाता है जितने का अंतर होता है, ताकि बैंक समाधान विवरण का निर्माण किया जा सके।

बैंक समाधान विवरण प्रारुप (bank reconciliation statement format) क्या है


बैंक समाधान विवरण का निर्माण(creation of bank reconciliation statement)-?


अंतर के कारणों की पहचान हो जाने के बाद समाधान विवरण निम्न दो प्रकार से तैयार किया जा सकता है:
{1} समायोजित रोकड़ बही शेष की सहायता के बिना बैंक समाधान विवरण बनाना।
{2} समायोजित रोकड बही शेष की सहायता से बैंक समाधान विवरण बनाना।
यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि अभ्यास में बैंक समाधान विवरण का निर्माण रोकड़ बही में समायोजन के बाद ही किया जाता है।

रोकड बही में समायोजन के बिना बैंक समाधान विवरण बनाना(creating bank reconciliation statement without adjustment in cash book)


बैंक समाधान विवरण बनाने के इस तरीके के अनुसार विवरण का प्रारंभिक बिंदु रोकड बही द्वारा दर्शाया गया शेष अशवा बैंक पासबुक के अनुसार शेष होता है। रोकड़ बही में दर्शाया गया नाम शेष फर्म के बैंक खाते में जमा धनराशि का प्रदर्शन करता है। इसलिए यह शेष बैंक पासबुक द्वारा दर्शाए गए जमा शेष के बराबर होता है। 

यह शेष, फर्म द्वारा जमा की गई राशि का आहरित राशि से अधिक दर्शाता है। इसे हम रोकड़ बही तथा बैंक पासबुक का अनुकूल शेष भी कह सकते हैं। दूसरी ओर यदि रोकड़ बही का शेष जमा हो तो वह बैंक अधिविकर्ष को प्रदर्शित करता है।

 तथा बैंक में जमा की गई राशि से अधिक धनराशि का आहरण किया गया है। दूसरे शब्दों में यदि बैंक में जमा की गई धन राशि आहरित धनराशि से कम है तो इसे रोकड बही व पासबुक के लिए प्रतिकूल शेष कहेंगे।


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