लेखांकन को पुरी प्रक्रिया में लेखे योग्य लेन देन तथा घटना की पहचान से लेकर लेखा-पुस्तको में उसे मापना, record करना, संक्षेप करना, वह परिणाम की उस व्याख्या तक जो की निहित हित वाले संगठनों को भेजा जाता है। इस वजह से ही लेखांकन के सभी सैध्दांतिक आधार के विकास की जरूरत महसूस होती है। लेखांकन के सैध्दांतिक आधार को ज़्यादा महत्व इसलिए दिया जाता है क्योंकि कोई भी विषय तैयार होना सैद्धांतिक आधार की कमी में विकसित नहीं हो सकता।
Basic Rules Of Accounting-?
सामान्य मान्य लेखांकन सिद्धांत- लेखांकन अभिलेखों में समानुरुपता व एकरुपता लाने के लिए कुछ सिध्दांतों व नियमों का विकास किया गया है जिन्हें इस पेशे से जुड़े सभी लेखाकारों की सामान्य स्वीकार हासिल है। इस तरह के नियमों को अलग-अलग नाम से जाना जाता है। जैसे- सिद्धांत, संकल्पना, सम्मेलन, योजना, परिकल्पना, शोधने वाला सिध्दांत आदि से जाना जाता है।
सिध्दांत शब्द को इस प्रकार परिभाषित किया गया है "कोई साधारण कानून या अपनाया गया नियम अथवा निर्दिष्ट कार्रवाई निर्वाहक, काबिज आधार अथवा आचरण व अभ्यास " तथा ''सामान्यतः'' का अर्थ सामान्य भाव में अर्थात कई व्यक्तियों, परिस्थितियों व व्यवहारों से संबंधित है। इसी कारण सामान्यतः मान्य सिद्धांतों (GAAP) से आशय वित्तीय विवरण के लिखने व निर्माण एवं दिखावे में एकरुपता लाने के उद्देश्य से उपयोग किये गये उन सभी नियमों व निर्देश देने वाली क्रियाओं से है। इनका इस्तेमाल व्यवसाय के अंतर्गत लेन-देनों के लिखने व दिखाने के लिए किया जाता है।
basic rules of accounting
मान्य लेखा सिद्धांतों की उन्नति एक लंबी अवधि में पहले ज्ञान, प्रयोग अथवा परम्पराओं व्यक्तियों एवं पेशेवर निकायों के विवरण एवं सरकारी एजेंसियों द्वारा नियमन के आधार पर हुआ है तथा यह ज़्यादातर पेशेवर लेखाकारों द्वारा सामान रुप से स्वीकार है लेकिन ये नियम स्थिर प्रकृति के नहीं है। यह उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं, वैधानिक, सामाजिक तथा आर्थिक वातावरण से प्रभावित होकर निरंतर बदलते रहते हैं।
Basic Rules Of Accounting
उदाहरण; एक महत्वपूर्ण नियम के द्वारा खातों में सभी लेन देनो का लेखा ऐतिहासिक लागत पर किया जाता है साथ ही इन लेन देनो की जांच मुद्रा भुगतान से प्राप्त नकद रसीद द्वारा होना भी आवश्यक है। ऐसा करने पर लेखन प्रक्रिया वस्तुनिष्ठ बनती है तथा लेखांकन विवरण उपयोग कर्ता द्वारा अधिक सहमत हो जाते हैं।
आधारभूत लेखांकन संकल्पनाएं (Basic Accounting Concept)-{2021}
आधारभूत लेखांकन संकल्पनाओं से तात्पर्य उस बुनियादी भाव या मूल अवधारणा से है जो वित्तीय लेखांकन के सिध्दांतों व अभ्यास में सहज है। साथ ही यह वह वृहद कार्य संबंधी नियम है जिन्हें लेखांकन पेशे से जुड़े व्यक्तियों ने लेखांकन संबंधि क्रियाओं को करने के लिए विकसित किया है। व्यवसायिक इकाई संकल्पनाओं को हम विस्तार से जानेंगे।
• व्यवसायिक इकाई संकल्पना- इस संकल्पना के अनुसार व्यवसाय का अपने स्वामी से अलग एवं आजाद अस्तित्व है, अर्थात लेखांकन के उद्देश्य से व्यवसाय व उसके मालिक को दो अलग-अलग अस्तित्व वाली इकाइयां माना जाएगा। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए जब कोई व्यक्ति व्यवसाय में पूँजी लगाता है तो लेखांकन अभिलेखों में इसे व्यापार के स्वामी के प्रति देनदारी के रुप में दिखाया जाता है।
यह इस तरह माना जाता है कि एक अलग स्वामी दूसरे अलग स्वामी को व्यवसाय के लिए धन दे रहा है। इसी प्रकार जब स्वामी व्यवसाय से कुछ धन अपने व्यक्तिगत प्रयोग के लिए निकालता है तो उसे स्वामी की पूँजी में कमी माना जाता है।
तथा इस तरह की क्रिया करने के परिणाम इस प्रकार है।
• व्यवसाय की देनदारियों में कमी आती है।
• व्यवसाय में लेखांकन अभिलेख व्यापार के दृष्टिकोण से लिखे जाते हैं न कि स्वामी की दृष्टि से।
इसी वजह से व्यापार की संपत्ति व देनदारियों को लिखते व प्रतिवेदन करते समय स्वामी की व्यक्तिगत परिसंपत्ति वह देयताओं की गिनती नहीं की जाती।
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• Conclusion (उपसंहार)-
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